चाँद
पेड़ों के झुरमुट से
झांकता हुआ वो चाँद
देखने में ऐसा लगा
मानो कोई नवेली वधु
झीने से परदे के पीछे से
सांवरिया को छुपकर
देख रही हो
उजले बदन वाला वो चाँद
एक अजीब सी ठंडक से
भर देता है तन मन को
सब के जीवन को
सब कुछ पा जाने का
और बहुत कुछ खो देने का
एहसास करा देता है ये चाँद
बादलों में छिपता हुआ वो चाँद
पेड़ों के झुरमुट से
झांकता हुआ वो चाँद
देखने में ऐसा लगा
मानो कोई नवेली वधु
झीने से परदे के पीछे से
सांवरिया को छुपकर
देख रही हो
उजले बदन वाला वो चाँद
एक अजीब सी ठंडक से
भर देता है तन मन को
सब के जीवन को
सब कुछ पा जाने का
और बहुत कुछ खो देने का
एहसास करा देता है ये चाँद
बादलों में छिपता हुआ वो चाँद
झुरमुट से झांकता हुआ वो चाँद।
Beautiful poetry ma'am... 😍😍
ReplyDeleteNice 1 mam
ReplyDeleteThank you 😊
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