बरखा की बूँद

बरखा की बूँद

जून के महीने की वो पहली बरखा
तपिश में ठंडी हवा का 
वो पहला एहसास
तन और मन को
कुछ इस तरह
सरोबार कर देता है
की बादल की गर्जना भी 
कोयल की मीठी
कूक सी लगती है
पेड़ों का झुक झुक कर 
नमन करना
सिर उठा उठा कर 
पशुओं का मौन होकर
प्यार से भीगते रहना
एक अनजानी मिठास से 
भर देता है।

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