प्रभात

प्रभात

ऊषा की इस लाली में
पक्षी का कलरव करना
इन वृक्षों की डाली में
नदिया का कलकल बहना
कोमल नन्हें पत्तों में
ठंडी वायु का बहना
प्रातः इन ठन्डे क्षण में
अलसायी पलकों का खुलना 
वसुधा के इस आँचल में
सुन्दरता का क्या कहना
नित्य प्रति का प्रात समय यह
शान्ति देता है मन को
कितनी ही नयी उमंगों से
छुता है मेरे अंतरमन को।

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