सृजन

सृजन

उठो नव सृष्टि का सृजन करो
दूर कर संताप को
दिलों के अवसाद को
तोड़ दो वे श्रृंखलाएं
जो तुम्हें अवरोध दें
एक ऐसी क्रान्ति का
आवाहन करो।
रूढ़ियाँ बंधन बनेगी
जातियां रोका करेंगी
पर न रुकना
तुम नयी सदी की
नव चेतना हो।



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